Tuesday, 12 July 2016

मै यमुना हूं और जीना चाहती हूं...

पूजा मेहरोत्रा
दिल्‍ली हर दिन नई होती जा रही है और उसकी आदि काल से पहचान रही यमुना दिन ब दिन मैली, गंदी और जहरीली होती जा रही है। यमुना को साफ सुथरी अविरल  दिल्‍ली ही नहीं बल्कि पूरा देश देखना चाहता है लेकिन उसकी सफाई सिर्फ सरकार की जिम्‍मेदारी मानी जाती है। दिल्‍ली और दिल्‍ली वाले इसकी सफाई के लिए कुछ करने को तैयार नहीं हैं लेकिन वे सरकार की तरफ उंगली उठाने से कभी नहीं रोक पाते। ऐसा करते समय वे यह भूल जाते हैं कि एक उंगली सरकार की तरफ होती है लेकिन बाकी उंगलिया अपनी ही ओर ही होती हैं। क्‍या सचमुच यमुना की सफाई सिर्फ सरकार की जिम्‍मेदारी है। क्‍या दिल्‍ली और देशवासियों का यमुना के प्रति कोई उत्‍तरदायित्‍व नहीं है ऐसा तब हो रहा है जब कि  यमुना को मैली, गंदी और जहरीली बनाने में अहम योगदान देशवासियों और दिल्‍लीवासियों का है।

यमुना सिर्फ एक नदी नहीं है। यह एक हमारा अतीत है, वर्तमान है और भविष्‍य भी है। यमुना आज जिस हालात में पहुंच चुकी है अगर आज हमने इसे नहीं संवारा तो आने वाली पी‍ढि़या हमें कभी माफ नहीं करेगी। 


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मंजिल देर से मिलेगी लेकिन मिलेगी


ज़िंदगी आपको पल पल राह दिखाती है, आज अचानक एक फोन आया कि आपको किसी से मिलवाना है जल्दी आ सकती हैं..
मैंने कहा जी चार बजे तक पहुंच जाउंगी..
बारिश थी की थमने का नाम नहीं ले रही थी...फिरभी गाज़ियाबाद जिंदाबाद का नारा लगाते हुए घर से निकली और पहुंच गई आनंद बिहार...रिक्शा किया.
बारिश से बचने का तो मतलब ही नहीं था..
.रिक्शा वाला भी मस्त हंस्ता हंसाता रिक्शा चलाता लिए जा रहा था...कहानी यहां से शुरू हुई.
.उसने पूछा मैडम आप वहां जा रहीं है क्या जहां दारू पीकर लड़का लड़की नाचते हैं....
मैंनेउसका मुंह देखा...कहां नाचते हैं..
.जिस जगह मैं गई थी उसके ग्राउंड फ्लोर पर डिस्को था...मैंने कहा-- नहीं.. 
उसने पूछा कितनी देर में आप आ जाएंगी..
मैंने कहा जी ज्यादा से ज्यादा आधे घंटे में..
.बहुत खुश होकर बोला..मैं इंतजार करूंगा..
.मैंने कहा नहीं नहीं आप जाओ, यहां रहते हैं रिक्शे वाले मैं आ जाउंगी.
.बोला मेरी दिहाड़ी पूरी हो गई है..अब मैं आराम से रह सकता हूं..
.मतलब वो सुबह से अभी तक अपनी रिक्शा का किराया काट कर ८०० रूपए कमा चुका था..खुश था.
.मैं जो पैसे दे रही थी वो बोनस था..
आज की बड़ी सीख..हर दिन का टार्गेट बनाओ और जब आप उस टार्गेट तक पहुंच जाएं तो मस्ती के लिए काम कीजिए..
मुझे आते आते एक घंटा लग गया और वो जो चुका था..लेकिन सीख दे गया था...
दूसरी सीख..
शायद बहुत बड़ी साख...मॉल में आपके सामान के बदले में कूपन देने वाला था...मुझसे उसने बिल मांगा..बरबस ही मुंह से निकल गया ...वेट..
.बोला..आई विल..
.मैं अभी उसकी तरफ देखती उसने आगे बढ़ कर कहा .
.मैम रिलैक्स...गिव मी योर बिलोंगिग्स..आई टेक केयर ऑफ इट...
मैंने कहा भाई मुझे इतनी इंगलिश नहीं आती..मैं चारों ओर देख रही थी कि क्या रैपिडेक्स तो नहीं पढ़ रहा..
.मैंने पूछा किस कंपटीशन की तैयारी कर रहे हैं...बोला..डिफेंस की...मैंने पूछा पढ़ाई कहां से की है...
बोला...बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से...
मेरे सकपकाने की बारी तो थी लेकिन मैं समझ चुकी थी अगर बड़े सपने पूरे करने हैं तो छोटी मुश्किलों से ऐसे ही लड़ना होगा...
इतनी कहानी लिखने का एक ही मकसद है..पहला टार्गेट बनाओ पूरा करो और खुश रहो...

दूसरा...सपने देखो और उसे पूरा करने के लिए जंग लड़ो...मंजिल देर से मिलेगी लेकिन मिलेगी...
सपने देखने की बारी अब मेरी..