Sunday, 4 June 2017

सरकार कुछ ऐसी व्यवस्था बनाए तो बात बन जाए

 पूजा मेहरोत्रा
अगर केंद्र सरकार, राज्य सरकार और निजी कंपनियां एक जुट हो जाएं तो हमारे देश की बड़ी समस्या बेरोजगारी चुटकियों में निपट सकती है..बस थोड़ी सी मेहनत, थोड़ी सी लगन और थोड़ी सी सतर्कता की जरूरत है... जिस तरह से सरकार ने मेडिकल, इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट के परीक्षार्थियों के लिए एक ही परीक्षा प्लैटफॉर्म का निर्माण किया है।  ठीक उसी तरह अगर नौकरी का प्लैटफॉर्म बन जाए तो न केवल टैलेंट को एक सही जगह मिल पाएगी वहीं दर दर भटकते छात्रों को भी छत मिलने का आसान मिल जाएगा...


कैसा हो अगर सरकारी सेवा और निजी नौकरियां एक ही प्लैटफॉर्म के ज़रिए मिले तो ..अगर मौजूदा सरकार की योजनाएं कारगर साबित हुईं और समर्थन हासिल हुआ तो ऐसा जल्द ही होगा। नौकरी की तलाश में बैठे युवाओं के लिए सरकार ऐ



सी व्यवस्था बनाने जा रही है, जिसमें एक ही परीक्षा से एक नहीं कई नौकरियों  के दरवाजे खुल जाएंगे। इसके लिए परीक्षार्थी को न तो बार-बार फॉर्म भरना होगा और न उसे अतिरिक्त पैसे खर्च करने पड़ेंगे। अगर सरकार की यह योजना कारगर साबित होती है तो यह नौकरी जगत में बहुत बड़ी क्रांती होगी। इस परीक्षा के जरिए सरकारी और प्राइवेट दोनों नौकरियों के लिए एक ही फॉर्म, एक ही परीक्षा और एक बार ही पुरजोर मेहनत करनी पड़ेगी।
 मोदी सरकार की इस योजना के मुताबिक यदि कोई युवा सरकारी नौकरी पाने के लिए कोई फॉर्म भरता है और उसमें सफल नहीं हो पाता है तो उसकी उस परीक्षा में प्राप्त किए गए अंक को अन्य राज्य सरकार और निजी नौकरियों के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकेगा। पिछले दिनों ही संघ लोक सेवा आयोग के परिणाम आए हैं. कई हज़ार स्टूडेंट ऐसे हैं जिनका चयन महज़ कुछ नंबरों की वजह से नहीं हो पाया होगा ऐसे विद्यार्थियों के लिए सरकार की यह योजना काफी कारगर साबित हो सकेगी। संघ लोक सेवा आयोग या कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षाओ में विद्यार्थियों का चयन महज एक और आधे नंबर की वजह से नहीं हो पाता है तो ऐसे विद्यार्थियों की कट ऑफ लिस्ट के हिसाब से मेरिट लिस्ट तैयार की जाएगी। इस मेरिट लिस्ट से प्रतिभाशाली युवाओं का चयन राज्य सरकार की विभिन्न विभागों और प्राइवेट कंपनियों में नौकरी के लिए किया जा सकेगा।
अगर सरकार की योजना कारगर साबित होती है तो आने वाले समय में यह नौकरी के बाजार में नया आयाम साबित होगा।
 छात्र एक सरकारी नौकरी के लिए कई तरह के फॉर्म भरते हैं। उसमें उनका काफी पैसा और ऊर्जा भी लगती है इस योजना के लागू होते ही छात्रों का पैसा और ऊर्जा दोनों में भारी बचत होगी। इस योजना की घोषणा खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले वर्ष दिसंबर में युवाओं को संबोधित करते हुए की थी। इस योजना को कैसे लागू किया जाए उसका खाका नीति आयोग और पीएमओ मिलकर तैयार कर रहा है। योजना का नक्शा तैयार होते ही सरकार निजी कंपनियों के अधिकारियों से इस बावत बैठक कर उनके अनुरूप ही इस योजना को आकार देगी। उम्मीद है कि यह योजना साल के अंत तक लागू हो।
 फिलहाल इस तरह की योजना प्रवेश परीक्षाओं में तो शुरू हो चुकी है। कॉमन इंट्रेंस टेस्ट  के माध्यम से मेडिकल और तकनीकी कॉलेजों, आईआईटी और आईआईएम की परीक्षाओं में स्टूडेंट सेलेक्ट किए जाने के बाद निजी स्कूल और कॉलेज रैंक के हिसाब से छात्रों का चयन करते हैं। ठीक इसी पद्धति का इस्तेमाल सरकार अब नौकरियों के लिए भी करने में जुटी है जिसमें सरकार परीक्षार्थियों से भी अनुमति चाहती है जिससे दूसरी नौकरी प्रदाता कंपनियां भी अच्छे और बेहतरीन कैंडिडेट्स का फायदा अपनी कंपनी के लिए उठा सकें। जिस तरह सरकार बैंकिंग सेवा के लिए कॉमन इंटरेंस टेस्ट लेती है जिसका फायदा निजी बैंक भी उठाते हैं।
पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस योजना के बारे में जानकारी देते हुए कहा था कि इससे बेरोजगारी में लगाम लगाई जा सकेगी और अधिक से अधिक स्टूडेंट और नौकरी प्रदाता कंपनियां इसका फायदा उठा सकेंगी।
सरकार इस योजना के तहत विभिन्न सरकारी परीक्षाओं में बैठने वाले कैंडिडेट्स के प्राप्तांक को ऑनलाइन शेयर करने का भी फैसला किया है जिसका मकसद है कि निजी कंपनियां प्राप्तांकों के आधार पर अपनी कंपनी के लिए योग्य का चयन कर सकें। यानी निजी कंपनियों को अलग से लंबी चयन प्रक्रिया चलाने की जरूरत नहीं होगी। सरकार लगभग अपने हर क्षेत्र के लिए कैडिडेट्स का चयन परीक्षा द्वारा करती है। जैसे एसएससी, रेलवे, बैंकिंग या ऐसी तमाम परीक्षाएं। अब इन एजेंसियों को  विद्यार्थियों का प्राप्तांक पब्लिक डोमेन में डालना होगा। सरकार इस ओर बहुत तेजी से काम कर तो रही है और एक खास तरह की वेबसाइट के निर्माण में भी जुटी है।वेबसाइट पर मौजूद डाटा को नैशनल करियर सेंटर से भी जोड़े जाने की योजना है। लेकिन सरकार को एक अहम कदम और उठाने की जरूरूत है। जिसमें वो उन स्टूडेंट पर भी लगाम लगाए जो पहले से ही किसी न किसी सरकारी नौकरी में हैं और वे दूसरी नौकरी के लिए फिर परीक्षा देते हैं। सरकार का इस तरह के कैंडिडेट्स में लाखों रूपए हर वर्ष बरबाद हो जाता है। अगर महज आईएएस की परीक्षा की ही बात करें तो इस परीक्षा में सैंकड़ों वो लोग शामिल होते हैं जो पहले से ही किसी बेहतरीन सरकारी नौकरी पर काबिज हैं और उस स्थान तक उस शख्स को पहुंचाने के लिए सरकार ने पहले ही लाखों रूपए खर्च कर दिएं हैं और जब वे फिर किसी और सरकारी नौकरी के लिए तैयारी में जुटते हैं तो सरकार का लाखों रूपए तो बर्बाद होता ही है साथ ही किसी एक छात्र का हक भी जाता है।
 २०१६ की टॉपर नंदिनी पहले से सरकारी सेवा में हैं और अब वो आईएएस की परीक्षा पास कर गईं हैं। 


बहरहाल एक परीक्षा कई नौकरियों वाली इस योजना को अंजाम तक पहुंचाने के लिए स्टूडेंट्स भी अहम योगदान दे सकते हैं।  जब वे नौकरी के लिए फॉर्म भर रहे होंगे तो उन्हें अपने प्राप्तांको को सार्वजनिक करने की अनुमति सरकार को देनी होगी। एक ही परीक्षा से कई नौकरियों के इस सरकारी प्रयास के लिए केंद्र के तीन मंत्रालय मिलकर अंजाम तक पहुंचाएंगे। कार्मिक विभाग मंत्रालय पोर्टल तैयार करेगा जिसमें सभी सरकारी और केंद्रीय भर्ती परीक्षाओं में शामिल होने वाले छात्रों का ब्योरा रहेगा। यहां उन्हीं कैंडिडेट्स की सूचना होगी जिन्होंने फॉर्म भरते हुए निजी कंपनियों में काम करने को मंजूरी दी होगी। लेकिन यह योजना भी तभी कारगर होगी जब निजी कंपनियां और राज्य सरकारें इस योजना में अपनी दिलचस्पी दिखाएं।